झीलो और मीनारो के अद्वितीय सगम का शहर भोपाल मध्य प्रदेश राज्य की राजधानी है। भोपाल शहर की स्थापना का श्रेय राजा भोज को जाता है। मुगलिया सल्तनत के अतिम शक्तिशाली शासक बादशाह औरंगजेब के समय में अफगान सरदार दोस्त मोहम्मद यहां का शासक था।सन्‌ 1707 मे औरगजेब की मृत्यु के बाद पनपी अराजकता का लाभ उठाकर उसने अलग राज्य की स्थापना की। इसके बाद यहॉ नवाबो व बेगमो का राज रहा जिन्होने अनेक खूबसूरत व विशाल मस्जिदे बनवायी जिनकी मीनारे ओर गुबद शहर को आज भी एक अलग छटा देते है। यद्यपि यह शहरᅠसन 1984 मे भयावह गैस हादसे के चलते अन्तर्राष्टीय स्तर पर सुर्खियो मे आया। भोपाल राजा भोज द्वारा निर्मित अपने विशाल तालाब के कारण सदियो से प्रसिद्ध रहा है। आज भी कहावत प्रचलित हैᅠ तालो मे ताल भोपाल ताल और सब तलैया।

दर्शनीय स्थल

 

बड़ा एवं छोटा तालाब: राजा भोज निर्मित बडे ताल ने इसे मुल्क की सरहदो के भीतर सदियो से शेहरत बखश रखी है। परमारवशी विद्वान एव गुणी राजा भोज निर्मित विशाल तालाब अन्य अनेक राजाओ व सम्राटो की रक्तरंजित सफलताओ व स्मारको से अधिक सुदर व श्रेष्ठ सिद्ध हुआ।

ताज-उल-मस्जिद : यह मस्जिद एशिया की सबसे बडी मस्जिद मानी जाती है। इसके परिसर मे दिसम्बर के महीने मे विश्व मुस्लिम शाति सम्मेलन इस्तिमा का मेला भी लगता है। इस मेले मे दुनियाभर के मुसलमान एकत्रित होते है। इस विशाल मस्जिद के निर्माण के शुरूआत शाहजहॉ बेगम ने 1868 मे की थी। मस्जिद का निर्माण कार्य बेगम के इतकाल के बाद हुआ। वस्तु की दृष्टि से भी यह मस्जिद माहजबियो के लिए एक नायाब तोहफा हैं।

जामा मस्जिद : स्वर्ण शिखर से मडित भोपाल के चौक मे स्थित यह मस्जिद क्रुदोसिया बेगम द्वारा बनवाई गई थी। कहा जाता है कि यहॉ पहले परमारवशीय राजा उपादित्य द्वारा 1059 मे निर्मित सभा मडप था। बहरहाल शहर के बीचोबीच मुखय बाजार जुमेराती' स्थित यह मस्जिद अति प्राचीन होने के कारण अपना महत्व रखती है। इसकी ऊॅची-ऊॅची मीनारे भोपाल शहर की शान मे कशीदे पढती दिखाई देती है।

भारत भवन :  विश्व प्रसिद्ध वास्तुविदें चार्ल्स कुरियर द्वारा निर्मित यह भवन वास्तुकला कीᅠ दृष्टिᅠ सेᅠ अदभुत है ही, साथ ही यहॉ होने वाले सांस्कृतिक परिसर के रूप में ही हुआ था। इसे देश का सांस्कृतिक तीर्थ भी कहा जाता है। आदिवासी संस्कृति व रंगकर्म के शानदार वैभव का अद्‌भुत संग्रह भारत भवन भोपाल की सुदर झाील के किनारे बना है। इसी प्रकार आदिवासियों की झोपड़ियॉं उनके रहन-सहन का नमूना पेश करती हैं।

गौहर महल : गौहर महल शौकत महल के पीछे की ओर की बडे तालाब के किनारे स्थित है। इस विशाल महल का निर्माण वर्ष1820 मे कुदोसिया बेगम जिन्हे गौहर बेगम के नाम से भी जाना जाता था द्वारा कराया गया था। यह महल हिन्दू व मुगल वास्तुाकला के सगम का एक अद्वितिय उदाहरण है। वर्तमान मे इस महल का पुनरूद्धार मध्यप्रदेश हस्तशिल्प व हथकरघा विकास निगम द्वारा कराया गया है और यहा अब हस्त शिल्प मेलो का आयोजन किया जाता है।

वन विहार : यह अभ्यारण्य बड़े तालाब के किनारे 445 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। यहां विभिन्न प्रकार के वन्य प्राणियों को उनके प्राकृतिक आवास में आसानी से देखा जा सकता है।

शौकत महल एव सदर मजिल : शौकत महल पुराने शहर मे स्थित अधिकाश प्राचीन इमारतो से वास्तुकला की दृष्टि से एक दम भिन्न है इस इमारत को एक फ्रांसिसी वास्तविक ने प्रारूप बनाया था। इसी के समीप मे सदर मजिल स्थित है जो भोपाल राज्य के पूर्ववती शासको के दरबार के रूप मे उपयोग मे आती थी। वर्तमान मे यहा नगर निगम का मुखयालय स्थित है।

 

बिड़ला संग्रहालय : यह संग्रहालय प्रसिद्ध बिड़ला मंदिर से जुड़ा हुआ है। यह गुप्त, कल्चुरी, चंदेल और परमारकालीन सभ्यता के नायाब नमूनों को कलात्मक रूप से पत्थरों पर उकेरकर प्रस्तुत किया गया है। संग्रहालय में एक आधुनिक लायब्रेरी भी है जिसमᅠ इतिहास,कला, वस्तु पर्यटन और संग्रहालय विज्ञान से संबंधित पुस्तकों का दुर्लभ संग्रह है।यहीं स्थित बिड़ला मंदिर भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंन्द्र है।चौंक भोपाल के पुराने शहर के मध्य में स्थित है। यहां अनेक प्राचीन मस्जिदें एवं हवेलियां स्थित हैंᅠजो भोपाल के प्राचीन समय के गौरव की याद दिलाती हैं। यहां संकरी गलियों के मध्य भोपाल की चुनिंदा दुकाने स्थित हैं। जहां भोपाल के प्रसिद्ध चांदी के आभूषण,पौत एवं जरी के बटुए इत्यादि मिलते हैं।

 

गुफा मंदिर : गुफा मदिर लाल घाटी के निकट स्थित है यहा प्रागऐतिहासिक गुफाए मे स्थित मदिर है। इसकी की खोज वर्ष 1949 मे स्वामी नारायण दास ने की थी। यहा विशाल सीढ़ी रूपी पटल के साथ श्री रामᅠलक्ष्मण सीता भगवान शकर देवी दुर्गा एव हनुमानजी की प्रतिमाए स्थित है।

 

 

शहीद गेट: यह विशाल ढॉचा पुराने शहर मे शाहजहांनाबाद के रास्ते मे स्थित है। इसे भारतीय स्वाधीनताᅠसघर्ष के शहीदो की स्मृति मे शहीद गेट के नाम से जाना जाता है।

 

वर्धमान पार्क : यह शहर के सर्वश्रेष्ठ उद्यानो मे से एक है ।यहॉ गुलाबो की अद्वितिय सुंदरता देखते बनती है। यह भोपाल के पुराने किले के अवशेषों पर स्थित है यहां से बड़े तालाब का अत्यंत मनोहारी दृष्य सूर्यास्त के समय देखा जा सकता है।

 

भारत धाम : यह स्थल भोपाल नगर से लगभग 7 किलोमीटर दूर भोपाल की सबसे ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। इसे मनुआ भाड की टेकरी के नाम से भी जाना जाता है। इस टेकरी पर जैन संत शिरोमणियों के चरण कमल की छवियॉं अंकित हैं और इसे जैन धर्म के एक महत्वपूर्ण तीर्थ का स्थान प्राप्त है।इस टेकरी के शीर्ष पर भारत धाम का विकास किया जा रहा है। जहां भारत की जानीमानी हस्तियो की मूर्तियां उनकी जीवनी के साथ स्थापित की जा रही हैं।

 

जीवन वाटिका : यह पार्क नगर निगम भोपाल एवं भारत जीवन बीमा निगम के संयुक्त प्रयास से स्थापित किया गया है। यहां वर्ष भर हजारों सैलानी आते हैं।